Monday, August 24, 2009

डायरेक्टरर्स कट







/सीन-१/ सुनेहरा मौसम/दिन
ब्लैक एंड व्हाइट शेड में आपकी गर्लफ्रेंड फरों वाला ओवरकोट पहने हुए है... गले में स्कार्फ, और घुटनों तक का बूट, उसके हाथ में आपके उधार के पैसों के लिया ऑर्किड का गुलदस्ता है.. क्योंकि उसे पसंद है... वो चार महीने बाद आपसे मिलने स्टेशन पर आ रही है... सिर्फ २० मिनट का वक़्त है, उस ट्रेन के उस स्टेशन विशेष पर रुकने का...

आपने कई रातें जग कर, हर भावना में डूब कर, कभी पहाड़ पर, तो कभी साहिल पर बैठकर, कभी जगती आँखों से कोई सपना देखते हुए उसे हर मूड में कई लव लेटर्स लिक्खे हैं... इसमें से कई मीर के शेर है तो कुछ चुराए हुए दोस्तों के मोबाइल से फॉरवर्ड किया हुआ एस. एम. एस., अगर गर्लफ्रेंड कुछ ज्यादा हाई-टेक है तो आर्चीज़ के दूकान के शाम के रंगीन साये में एक दुसरे पर झुकते कपल्स के धुंधले चेहरे के बैकग्रऔंद में कुछ अंग्रेजी कोटेशन्स, आप चेप देते हैं... क्योंकि आपने तो सिर्फ प्यार किया! ऐसे उच्च ख्याल कहाँ आये आपने दिमाग में?

... हाँ कॉपीराइट आप ज़रूर लेते है, वाजिब भी है अपना पढाई छोड़ कर, अपना काम छोड़ कर, बायोलोजी के प्रैक्टिकल एक्साम के ज्यादा फीस बताकर आपने अपने पिता जी बहुत से पैसे निकलवाए हैं... और उनके लिए चोकलेट्स हर फ्लेवेर्स के लिए हैं...

आपके लिख्खे हुए में कुछ रूमानी ख्याल लिए हुए हैं जिसका जवाब आप उससे इस मूड में इंतज़ार कर रहे हों की वो तकिये को अपने सीने के नीचे लगा कर पांव हवा में लहराते हुए लिख्खेगी... और वो चिट्ठी आपकी वसीयत बन जायेगी... आपने शायद उसे लेमिनेट करवाने का भी सोचा हो...

... और आप यह सब आँखों में आंसू भर कर अपनी प्रेयसी को देते हैं... वो मुस्कुराते हुए ले लेती है... कुछ इस अदा से की उसने एहसान किया और आपका जीवन धन्य हुआ... वो लेकर खुश है और आप उन सहेजे हुए चीजों को मकाम तक पंहुचा कर...

/सीन-२/ सुनेहरा मौसम/दिन/

... शिकायतों का सिलसिला आप शुरू करते हैं, क्योंकि कहने को आपके पास इतने लेटर्स के बाद भी बहुत कुछ है... ''तुम फ़ोन नहीं करती हो, सिर्फ सन्डे को रात में ४ घंटे ही बात करती हो (बिल आपका होता है) मुझे टाइम नहीं देती हो, उस सी. डी. को सुना था जो मैंने खास जगजीत सिंह और सोनू निगम का लिमिटेड कलेक्शन तुम्हारे लिए मंगवाया था ?" ...

... अच्छा अब एम. बी. ए. करने क्या बंगलौर जाओगी ? पहले ही दिल्ली जा कर दूर हो गयी हो.

ट्रेन सिटी मारती है, आपका रुदन और बढ़ जाता है...

आप थोडा बड़े परिपेक्ष्य में देखा शुरू करते है... अच्छा, अपना ख्याल रखना, (आप इस वक़्त उसके परिवार के रिश्तेदार बन जाते हैं... शायद माँ-बाप) इसी बीच आपको ख्याल आता है- अरे ! रोमेंटिक बात करने का टाइम तो मिला ही नहीं. (जाते वक़्त उसे अपना जताना नहीं भूलते... ) कभी मेहदी से अपने हाथों पर मेरा नाम भी लिख लिया करो, इन गुलाबी होठों का ख्याल रखना... अब आप अपना अंतिम दांव मारते हैं... (अपना मेक्सिम्म) "अपना ख्याल रखना यानि मेरा ख्याल रखना... "

और ट्रेन चल पड़ती है... छुक- छुक, छुक - छुक ...

वक़्त आपके दिल में रुक जाता है, आप बहिन के शादी वाले भाई के तरह कर्तव्यनिष्ठ हो जाये हैं.. आपको त्याग, प्रेम से बड़ा लगने लगता है, वो खिड़की से बाहर अपना हाथ निकालती है, आप उसे चूमना चाहते है लेकिन १०० बंधने हैं... लोग देख रहे है से लेकर मर्यादा हनन तक के विचार आते है...

आप दौड़ कर थोडा आगे तक जाते है और अपने शर्ट से चाँदी की पायल निकाल कर उसे थमाते है... वो मुस्कुराती है... आप आँखें बंद कर उसके चहरे को अपने दिल के फ्रेम में बंद कर लेते हैं... वक़्त रुक जाता है...

(शोर्ट फ्रीज़ हो जाता है)

Monday, August 10, 2009

ओवर आल वी वर्क फॉर हियुमिनिटी एंड व्हेन...

वो ७५ डिग्री की एंगल लिए लैपटॉप पर काम कर रही है... टांग पे टांग चढा कर बैठी है... बाल शैंपू किये हुए है और शहराना अंदाज़ में खुले हैं... जो दोनों रुखसारों को ढके हुए हैं... साथियों को बस बीच में उनकी नाक ही नज़र आती है... बालों को बीच-बीच में दिलफरेब झटका सा दे देती है... और मेरे पुरुष साथी निढाल हो जाते है...

हाँ-हाँ नीचे से जींस, एक हाथ कटी हुई है... कैपरी कहते है शायद उसको... एक शोर्ट सा कुरता पहना है... कोई उत्तेजित करता सा इत्र लगा रखा है... उसने कभी बासी खाना नहीं खाया है, यह बात उसकी स्किन बोल रही है, पजेरो में बैठा ड्राईवर कुत्ते की तरेह चौकन्नी नींद सो रहा है... और वो लैपटॉप पर काम कर रही है...

वो जब भी किसी की तरफ नज़र उठाती है, आँखों पर का स्क्वायर चश्मा चमक उठता है, ...फर्राटेदार, चमकदार अंग्रजी बोलती है... एक प्रेशर सा बनाती है अपने साथियों पर... सबसे पहले और सबसे ज्यादा बोलती है... वो चाहती है उसके मुंह से कमांड छुटते ही वो काम हो जाये, किसी चीज़ की फरमाइश करते ही उसके नाक पर ठोक दी जाये... वो पशेंसलेस है... वो योजनाएं बनाती है, यू एन में काम करती है,

वो शक्लें देखकर मुस्कुराती है... वो ए. सी. गाड़ियों से नीचे नहीं उतरती... वो स्लम के बच्चों के लिए डिजाईन डोक्युमेंट तैयार करती है... उनके कुपोषण पर चर्चा करती है...उसने गरीबी पर रिसर्च किया है... वो जानती है कितने डॉलर का फलाना प्रोजेक्ट होगा... और उसके लिए फंड कैसे आता है... लम्बे से टेबल पर बिसलेरी की बोतलों के बीच... वो मुद्दों की बात करने वालों को इंग्लिश में डांट देती है... यह डांट घंटे भर चलती है... मुझे अंग्रेजी नहीं आती... वो मानसिक रूप से उसे तोड़ देती है... वो सभी एक ऐसी जमात में शामिल है... जो मानवता के लिए काम करते हैं... और वो लैपटॉप पर काम कर रही है...

वो बेवक्त थैंक्यू, वेलकम और ग्रेट बोलती है... और इस बीच में सॉरी बोल देती है... वो किसी की बात नहीं मानती है फिर भी थैंक्यू बोल देती है... ७५ डिग्री की एंगल लिए लैपटॉप पर काम कर रही है... वो उनके लिए रेडियो प्रोग्राम बनाना चाह रही है... बजट लाखों का है, वो कभी स्लम नहीं गयी... वो कई सेमीनार में कुपोषण की स्पेसिलिस्ट है... दर्ज़नों संस्थाओं में एड्वैज़र है... प्रोग्राम में वो ह्यूमन एंगल नहीं समझती है... हम बच्चों के लिए प्रोग्राम बना रहे है या उनके लिए मैं नहीं समझ पा रहा हूँ... एक गुस्से भरी उमस के साथ मैं उसे देखता हूँ... वो अपनी कातिल हंसी सबके चेहरे पर चस्पा देती है... बड़े साहब कहते है उसकी सेक्स अपील कमाल की है...

वो मानवता की सेवा करती है... शायद डॉलर में कमाती है... सबको नाम से पुकारती है... बड़े युनिवेर्सिटी से पढ़ कर आई है... उसके पास ढेरों आईडियाज़ है... पैसे उगाहने के... मैं सोचता हूँ दुनिया में जब तक यह कुपोषण, एच आई वी, गरीबी है, इनकी दूकान हरी रहेगी... मुझे इतिहास का चरित्र याद आता है " कहीं की राजकुमारी थी उसके मुल्क में आकाल आया हुआ था और वो जनता को केक खाने की सलाह दे रही थी" अभी प्रोग्राम शुरू भी नहीं हुआ है और ७० लाख खर्च हो चुके है... वो अपने लैपटॉप पर बाजरे वाले चार्ट में पीला रंग भर रही है, होठों पर वोही सेक्स अपील है... और मेरे साथी रात के ११ बजे भी नहीं थके...

मुझे कल जल्दी आना है, मैं घर जाने की बात कहता हूँ... वो प्लेट से सेब का एक टुकड़ा मुंह में रख कर चबाते हुए कहती है "यू नो आवर शेड्यूल इज वैरी हेकटिक" आफ़्टर आल वी वर्क फॉर हियुमिनिटी एंड व्हेन यू सर्व.... आगे की अंग्रजी मेरे पल्ले नहीं पड़ती...

Friends

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