Saturday, April 16, 2016

उसने दिल पर चीरा लगाकर उसमें अपने होंठों का प्राणवान चुम्बन के बिरवे रोप दिए।




सौ तड़कती रातें हैं फिर एक मिलन का दिन है। एक हज़ार बद्दुआएं हैं, फिर नेमत की एक घनघोर बारिश है। बारिश कम है जीवन में, प्यास अधिक। इतनी अधिक कि कई बार बारिश के दिन भी प्यास नहीं बुझती। लगातार लगती प्यास हमें मारती है, पत्थर बनाती है। सूखे प्यास का नमी भरा एहसास बारिश वाले दिन ही होता है। दरअसल आज जब मेरी प्यास बुझ रही थी तब मुझे अपने प्यासे होने का सही अर्थ संदर्भ सहित समझ में आया।
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उसका हाथ अपने हाथ में लिया तो एक ढाढस सा लगा जैसे कोई एक सक्षम व्यक्ति कारगर उपाय बता रहा हो। वो अनपढ़ जाने किस तरह की शिक्षित है कि वह मुझ जैसे अहंकारी में भी कृतज्ञता का भाव पैदा कर देती है।
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हमने बहुत कोशिश की एक होने की। लेकिन इसी प्रयास में हमारा यह विश्वास पुख्ता हुआ कि हमें एक दूसरे की जरूरत हमेशा रहेगी और हम अधूरे ही रहेंगे। यहां तक कि जिस जिस चुंबन में हमने अपने आप को पूरा समेट कर एक दूसरे में उड़ेल दिया, वहीं वहीं हमें अपने विकलांगता का एहसास हुआ।
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कोई मां बाहर अपने बच्चे को मार रही है। बच्चा ज़ोर ज़ोर से किकियाए जा रहा है। मां गुस्से में उसे और धुन देती है। बच्चे के रोने में चिल्लाहट बहुत है। एक घौलाती हुई वेदना। चीत्कार जिसे शब्द नहीं मिल रहे हैं। बच्चा बेबस हो दोनों बाहें पसार मां की ओर आना चाह रहा है। आंखें सजल हैं लेकिन उसमें  आंसू के नए नए खेप नहीं आ रहे हैं। वह अपने आंसू बचा रहा है कि जब मां उसे फिर से खींच कर अपने कलेजे से लगाएगी तब वह जाने कहां से आंसूओं का अंबार लाएगा और रोने का सही मतलब समझाएगा। 
मैं भी तुम्हारे सामने ऐसे ही होता हूं रानी।
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प्रेम में जब आज हम लबालब हुए, दुनिया थोड़ी और सहन करने की ताकत आई। 
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एक बैले डांसर का सा शरीर सौष्ठव है तुम्हारा। नाभि से तरंग उठता है, नितंब में उद्वेलन होता है। नाक फड़फड़ाती है और प्रेमी झंकृत हो जाता है। 
प्रेम नृत्य है और हर प्रेमिका एक नृत्यांगना है।

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