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Showing posts from June, 2012

जो रिपोर्ट में नहीं है...

परसों तकरीबन सुबह पौने नौ बजे हमारे प्यार को गोली एकदम सामने से मारी गई।
वही वह रोज़ की तरह अपने घर साढ़े आठ में निकली थी। अपनी गली तक हस्बे मामूल अपने चोटी की दुम में उंगलियों से छल्ला बनाते आई। फिर जैसे ही उसकी गली, चौक के खुले सड़क पर आकर जुड़ी उसने झटके से अपने बालों को झटका देकर पीछे कर लिया जैसे घर की सरहद खत्म हुई। सब कुछ आदतन ही था। गुरूवार का दिन से लेकर उस दिन अपनी दीदी का पीला सूट पहने जाने वाले तक की बात भी, उसका फिटिंग ढ़ीला होना भी और एक आखिरी बार सबसे नज़र बचा दाईं ओर के ब्रा के स्ट्रेप्स को थोड़ा पीछे धकेलना भी। सबसे अंत में गर्दन नीचे कर एक नज़र अपने सीने पर भी डाली और सब कुछ ठीक रहते हुए भी अपना दुपट्टा ठीक किया।
हालांकि मैंने आत्महत्या की कोशिश की और उसमें असफल रहने के बाद मिल रहे उलाहने और हो तमाशे के बाद मेरा सिर घुटा हुआ है। मैं दिखने में पागल जरूर लग रहा होऊंगा लेकिन ईश्वर को हाजि़र-नाजि़र मानकर अपने पूरे होशो हवास में इस बात पर कायम हूं कि मैं शारीरिक रूप से न सही मानसिक तौर पर पूरी तरह स्वस्थ हूं। और इस लिहाज़ से मेरी याददाश्त पर भरोसा किया जा सकता है।
तो आदत…

चंद रोज़ा आरजूओं का चराग झिलमिला कर बुझ गया.

शाम का वक़्त है। दरगाह से अजान की आवाज़ आ रही है। अगर अजान का सुनना भी खुदा में यकीन रखना है तो मैं पांच वक्त का नमाजी हूं। यदि गिनना ही आधार हो तो खुदा तो पांच वक्त के लिए हुआ। इस आधार पर तुम कितने वक्त की हुई ? और जब नहीं हुई तो मेरे शरीर में बयानवे प्रतिशत महक तुम्हारी बच गई है। बाकी के आठ प्रतिशत बदन के भीगे प्यार के वायरस से लड़ेगा। चिंता की बात बस यह है कि इन दिनों अल्पसंख्यकों की प्रतिरोधी क्षमता भी कम है। कुछ इस तरह कि अब खुद को बस यकीन दिलाने के लिए संभोग के दौरान तुम्हारे आवाज़ में कुछ बुदबुदाने लगता हूं। नहाने से पहले कपड़े उतार कर पाता हूं कि उनमें एक दो कपड़े तुम्हारे हैं।
मैं अपनी छाती पर तुम्हारा स्तन महसूस करता हूं।

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ज़रा एक मिनट ठहर कर विश्वास कर लूं कि यह मेरा दिल है जो पूंछ कटी छिपकली की तरह मंच पर छटपटा रहा है। यह सांप न जाने कैसे इस भली बस्ती में आ गया जहां देखे जाने के बाद अंतिम पंक्ति लिखे जाने तक लोग उसे अधमरा कर उस पर मिट्टी तेल डाल उसका नृत्य देखने में तल्लीन हैं। बस एक मिनट! ज़रा मैं भी अपनी दुर्दशा देख लूं। असल में मैं बड़ा खिलाड़ी किस्म का रहा साहब। दा…