Friday, August 13, 2010

गुफ़्तगू



me: हाय सुचित्रा
  क्या हाल
  ऑफिस में हैं ?

SUCHITRA: हाय  सागर
4:12 PM ठीक  ठाक  ऑफिस  में  ही हूँ
  और  आप  ?

me: ऑफिस  में 

SUCHITRA: so कहाँ काम करते हैं आप  ?

me: दिल्ली 
  थोडा mod  बन  के  कहूँ  तो 
  डेल्ही

SUCHITRA: इन  व्हिच कंपनी ?

4:13 PM me: हे हे   
  आपके जैसा  MNC में  नहीं  हूँ 
  बस दिहाड़ी  मजदूर  हैं 

4:14 PM SUCHITRA: ओ. के.  ...आपको  कैसे  मालूम  हमारी कंपनी MNC  है ?

me: देखने वाले चील की नज़र रखते हैं :P

4:15 PM SUCHITRA: Wow..क्या thekha hai IM ke throught 
  through

 me: हा हा 
  आप बताइए 
  अगर डिस्टर्ब कर रहा  हूँ तो.... 
  बता दें 
  शरमायें नही
4:16 PM प्लीज़ 

SUCHITRA: शरमायें नहीं मतलब ?
  मतलब  ?

me: मतलब  हिचकिचाएं नहीं 

SUCHITRA: अब ये सही शब्द है 

me: कई  बार  कुछ  सीधे -सीखे  कहना 
  मुश्किल होता है 
4:17 PM ना इसलिए

SUCHITRA: आप तो  राइटर  जैसे बात करते हैं 

me: हूँ, ही 
  क्या करें 
  धर्म निभाना पड़ता है 

SUCHITRA: हम लिखते ज़रूर हैं ....लेकिन इंसान प्रक्टिकल हैं 
  निभाते रहिये 

4:18 PM me: जानता हूँ 
  कि आप प्रक्टिकल हैं 
  वो हर्फों  में  चेहरा  नुमाया होता  है 
  होता जाता है 
  फिर तस्वीर बन जाती है 

4:19 PM SUCHITRA: wow....नॉर्मली ऐसे ही  बात करते  हैं  क्या आप  ?

 me: हाँ  
  क्यों 

SUCHITRA: हर्फ़, चेहरा, नुमाया और तस्वीर 

me: कोई खराबी है !
4:20 PM जी 
  यही तो मिलकियत है अपनी 

SUCHITRA: नहीं .....
  दुर्लभ जीव हैं फिर  :-)

me: अच्छा !
  कमाल है 
4:21 PM क्या हुआ 
  रुक क्यों  गयी ?

SUCHITRA: चले ही  कब  थे ?

4:22 PM me: अभी तक  तो  चल रहे थे 
  फिर चल पड़े  हैं 

SUCHITRA: हा हा  हा ....कमाल है 

me: कितना ?
  
SUCHITRA: चलिए आप  यूँ  ही  चलते  रहिये 
  फिर  हम  चलते हैं 

me: यह जाने का लक्षण  था 
  चलिए से ही समझ गया था

4:23 PM SUCHITRA: ये अंदाज़ था ....आगाज़ किया था हमने 
 me: अंजाम का !
  ?

SUCHITRA: अंजाम यही कि  जा  रहे  हैं 
4:24 PM चलो bye
  have a nice time ahead

me: शब्बा खैर ..

SUCHITRA: :-) 


          ***
{सुचित्रा (बदला हुआ नाम) और यहाँ उनकी अनुमति से; आभार.}

15 comments:

  1. सुचित्रा से हमदर्दी है.. जानती नहीं किस हलकट से बतिया रही है..

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  2. एक गाना याद आ गया
    "कहिये सुनिए कहिये ना ... कहते सुनते बातों बातों में ..... हो जाएगा

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  3. दुर्लभ जीव हैं आप( सही है ).अगली chat का इंतज़ार..:)

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  4. सोनल जी ने खूब कही...लेकिन पता नहीं--- हो जाएगा कि नहीं...और चैट...
    अब हमारी वाली लगने वाली है क्या ???? :-)

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  5. खूब रही ये चैट...:)

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  6. भई कुछ कन्फ़्यूजन हुआ है हमें..दूसरा नाम भी बदला हुआ है क्या..यह आप तो नही लगते..कोई और ’सागर’ है..मेरा मतलब कोई शरीफ़ सागर है! ;-)
    ..खैर पता चलता है कि चीलें कहाँ उड़ रही हैं आजकल..! और खुद की तारीफ़ें करवाने का अंदाज भी अच्छा..:-)

    बढ़ियाँ हैं..लगे रहो सागरभाई!!:-)

    और शब्बा कौन है..जिसकी नित खैर माँगी जा रही है ;-)

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  7. Koi chat bhi blogging ka hissa ban sakti hai..aaj pata chala...suna hai kahaniya tukdo mein poori hoti hain...Haan aagaz achcha hai:-)

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  8. कुश से १००% सहमत हूँ कि सुचित्रा को नहीं पता कि किस हलकट से पाला पडा है.. सुचित्रा से पूरी सहानुभूति है.. :(

    वैसे बदले हुये नाम पर भी तुम्हे बख्श दिया गया? बदला हुआ नाम भी ’अच्छा’ होना चाहिये था यार!.. :-)

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  9. :)
    बड़े मियाँ दीवाने ऐसे न बनो :)

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  10. हम जान गये हम जान गये। ई पहिला प्यार वाला सोनू है. कोई भी सी डी चला लेता है । गद्य की चाटीय विधा काफी लोक्प्रिय हो रही है आज कल।
    सत्य

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  11. विगत पौने घंटे से अजीब पोस्ट यात्राओं से गुजरा हूँ। पहले पीडी, फिर अपूर्व और अब तुम....

    ये आजकल के लड़के...उफ़्फ़्फ़्फ़!

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  12. इस चेट में भी ना ... शब्द कम और अनकहा ज्यादा....

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