Tuesday, March 8, 2011

क़िसास. क़िसास. क़िसास.



क्या जरूरी है कि मरने के लिए दौड़ती ट्रेन से टकराया जाए या फिर रबर के गेंद की तरह जमे हुए सीमेंट के बोरे पर सिर को पटका जाए। चलते फिरते भी मरा जा जा सकता है। नमक की तरह पानी में घुला जा सकता है और जनवरी की रात में टंकी में रखे पानी की तरह जमते हुए भारी हुआ जा सकता है।

जिंदगी का डार्क शेड कैसा होता है ? क्या वो भी ब्लैक होल्स की तरह चमकता है। कोई चीज आखिर कितनी बदसूरत हो सकती है ? किस हद तक गुमराह हुआ जा सकता है ? 

यह सच है कि पिछले कुछ दिनों से मुझे संभोग से भी विरक्ति हो गई है। जबान का जायका खराब रहता है, रात भर सो कर उठता हूं और खुद का थका हुआ पाता हूं। मन स्पेनिश सांढ सा नथुने से जोर जोर का सांस मारता हुआ इधर इधर दौड़ता है  और बार बार इसे लिखते हुए यों महसूस होता है जैसे मैं परदेस में रह रहे अपने बेटे को अपनी बीमारियों का जिक्र सिर्फ उसे वापस बुलाने के लिए कर रहा हूं।

सुना हर गरम चीज़ की उमर कम होती है। मशीन ज्यादा गर्म हो तो फूंक जाती है। तवा ज्यादा गर्म हो तो रोटी जला सकती है। और जो पार्क में किसी लैम्प पोस्ट में लगे बिजली की बल्ब की तरह जलते हुए खड़ा है और बारिश की एक बूंद भिगो रही है, यह कैसा चैतरफा आघात है? दण्ड पाते समाज में सिर झुकाए लैम्प पोस्ट में लगा बल्ब जो जलने के बाइस उम्र कम होना अपने नसीब में लिखवा लाया है क्या उसे यह बताने से क्या होगा कि जब तक जले रोशनी दी। ऐसे में एक रूसी कविता याद आती है कि ये सारे चमकने वाले चीज खुदगर्ज हैं यह सिर्फ अपने लिए चमकते हैं।

कसम से इस मौसम ने बहुत सताया यार। नहीं मुझे लगता है कि सताया हर मौसम ने है पर अबकी मैं इन दर्द को लिख सका इसलिए यह ज्यादा नुमायां हो रहा है। तुम तो जानते हो न इस बेदर्द दुनिया में शोर सुनी जाती है, समझी जाती है और उसकी इज्जत की जाती है।

इन दिनों मंटो को चाट डाला और अंतिम खंड पढ़ते हुए यह महसूस हुआ कि मंटो की तरह मेरे भी बदन का दर्जा-ए-हरारत नोर्मल से एक डिग्री ज्यादा रहता है। 

... तो क्या लगता है तुम्हें हम कितनी जल्दी मिल सकते हैं? 

6 comments:

  1. खुश रहना एक निर्णय है ...

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  2. इन दिनों मंटो को चाट डाला और अंतिम खंड पढ़ते हुए यह महसूस हुआ कि मंटो की तरह मेरे भी बदन का दर्जा-ए-हरारत नोर्मल से एक डिग्री ज्यादा रहता है।
    अरे तो फिर फ़िलहाल पढना बंद कर दो भिया...

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  3. जितनी जल्दी हो उससे मिल ही लो...लक्षण ठीक दिशा नहीं लेते दिखते...:)

    बढ़िया पीस...

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  4. बार बार इसे लिखते हुए यों महसूस होता है जैसे मैं परदेस में रह रहे अपने बेटे को अपनी बीमारियों का जिक्र सिर्फ उसे वापस बुलाने के लिए कर रहा हूं।

    Best part of this post!!!

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  5. गरम चीज़ की उमर कम होती है। ...पर उसका असर और जलन लम्बे समय तक बने रहते है :-)

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  6. हर गर्म चीज की उमर कम होती है, उमर रहती है तो गरम नहीं सहती है।

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