Friday, June 17, 2011

दोनों के कान में एक-एक लीड था, लगता था गाना बंट रहा हो लेकिन गाना पूरा था.


4 comments:

  1. आपकी लेखनी बहुत ही प्रभावी है।

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  2. तेरी आवाज़ को काग़ज़ पे रख के
    मैंने चाहा था कि पिन कर लूँ
    कि जैसे तितलियों के पर लगा लेता है कोई अपनी एलबम में...

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  3. mere dost..mere bhai.... aise hee likhte rahe to ek din meri umar le jaoge... aaj bahut dinon baad aisa kahne ka dil hua kisi ko...

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  4. तुम्हारे हाथ का लिखा कुछ पढ़ती हूँ तो सालों बाद भी इस बात पर यकीन होता है कि तुम वाकई में हो.

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