Friday, February 10, 2012

वक़्त को स्टेचयू कहा है हमने, जरुरत क्या तस्वीर की; फुर्सत की



Chubby cheeks, dimple chin 
Rosy lips, teeth within, 
Curly hair, very fair, 
Eyes are blue, lovely too, 
Mama's pet, is that you?? 
Yes! Yes! Yes!

बहती नाक में इत्ते सारे काम गिल्ली ही संभाल सकती है। गिल्ली। इस नाम के पीछे सीधा सा परिचय यह कि महादेवी वर्मा के एक कविता की आधार पर यह नाम रखा गया है। लंबे  से एक नेवी ब्लू स्कर्ट और सफेद कमीज़ में डेढ़ हाथ की गिल्ली। बदन पर एक तिहाई कमीज और दो तिहाई बहुमत में लिपटी गिल्ली। प्यारी गिल्ली। दुलारी गिल्ली। मोटू गिल्ली। ऐसी गिल्ली, वैसी गिल्ली। जाने, कैसी कैसी गिल्ली। पूरे घर में बस गिल्ल ही गिल्ली।

मां-पापा ने कुछ सोच कर रही इत्ता लंबा स्कर्ट खरीदा है कि कम से कम इस खेप से ही वो दसवीं कर लेगी। कम से आठवीं का टारगेट तो पूरा कर ही लेगी! करना कुछ नहीं है, अगर कमर का साइज ठीक रहा तो बस नीचे के बंधन बढ़ती उम्र के साथ खोलती जाएगी। स्कर्ट ऑटोमेटिक रूप से उसकी लंबाई को कवर करता चलेगा। एक सौ सत्तर रूपए में एक ही थान से भाई के लिए हाफ पैंट और बहन के लिए स्कर्ट खरीदी गई है। खैर...!

एनुअल फंक्शन के लिए रिहर्सल कर रही है। स्कर्ट ऐसी है कि पूरे रास्ते को बुहारती चलती है। अक्सर अपने ही जूता उसकी स्कर्ट को दबाता और गिर जाती। गिर जाती तो पीठ पर लगा बस्ता आगे की ओर निकल आता। झुके हुए में चेहरे पर भार पड़ता तो ढीली डंडी वाला चश्मा नाक पर उतर आती। उसे अक्सर लगता कि किसी ने उसे धक्का दिया है, उसी हालत में झटके से पीछे देखती। चेहरा गोया  गिल्ली  नहीं, पूरी एक लिंक बेस्ड साॅफ्टवेयर लगती जहां एक गड़बड़ हुई तो पूरे गिल्ली रूपी द्वीप पर उथल पुथल मच जाता।

स्कूल की आखिरी पिरीयड् है सो कंधे पर बस्ता भी है। छुट्टी की घंटी बजेगी तो बच्चे सीधे वहीं से अपने अपने घर को जाएंगे। जिम्मेदारी का यह भार गिल्ली ही उठा सकती है। जुकाम से परेशान गिल्ली के शरीर में इस वक्त कई सारी नसें तनी हुई दिखती है। सांस खींचती है तो माथे, गले सबकी नसें तन जाती है। वैसे अपनी गिल्ली है बड़ी जुझारू। आप देख रहे हैं न उसे ऊपर लिखी राइम्स पढ़ते वो भी पूरे भाव में। कैसे वो जब चब्बी चिक्स बोल रही है तो अपने स्पंजी गुलगुले गाल को तर्जनी और अंगूठे से पकड़ती है ! अब आप समझ गए होंगे कि इस राइम्स के लिए गिल्ली ही क्यों चुनी गई। तो कहना ये कि सारा का सारा क्यूटनेस गिल्ली में ही समा गया है और बहती नाक उसके इस कविता पाठ में चार चार चांद लगा रही है।

चोकलेट खाने के मामले में गिल्ली और उसके भाई में यह एक बेसिक सा फर्क है। उसके भाई में धैर्य नहीं है। वो टॉफी मुंह में रखते ही चबा डालता है। उसका वश चले तो रैपर सहित चाॅकलेट चबा ले लेकिन टीचर ने जब से बताया है कि रैपर पेट में गलता नहीं बल्कि वहां जम जाता है और आंतों का नुकसान करता है तब से वह इस आविष्कार में जुटा है कि वह बड़ा होकर ऐसी कंपनी खोलेगा जिसमें रैपर सहित चोकलेट खाने के थीम पर काम हो। हालांकि क्लास के अमीर बच्चे कहते हैं ऐसी चोकलेट भी होती है लेकिन वो महंगी है। उन बच्चों के इसी बात में उसके इस आविष्कार का उत्तर छिपा है। 


लेकिन इसके उलट गिल्ली में अपार धैर्य है। वो एक टॉफी को मनचाहे समय तक जुबान पर घुलाती है। उसे पता है तालु पर कितनी देर में पिघलेगी, कंठ पर रोके तो कितना समय लगेगा। जीभ के नीचे रख लिया जाए तो थोड़े देर तक पता नहीं चलेगा लेकिन लार अगर जमा किया जाए तो मीठा ही मिलेगा। गालों में दबा लेने से तो खैर किसी को पता ही नहीं लगना। हां लेकिन थोड़ी थोड़ी देर पर इधर से उधर ट्रांसफर करते रहना है। दांतों के बीच फंसा लेने का कोन्सेप्ट भी इसी प्रयास से आया था और जिस दिन से आया गिल्ली को अपने दो दांत कम होने का कोई मलाल नहीं।

अब इसी दृश्य में आगे चलते हैं। जब वो टीथ विद इन पर पहुंचती है तो भरसक कोशिश कर रही है कि उसके पूरे दांत नहीं दिखें। यहां टिथ विद इन पूरी तरह उसकी इस समझ से जुड़ा है कि यहां उसे अपने दांतों को दिखाना है और बचाना भी। पूरी तरह दिखाने से टीचर के नज़र में भी यह चीज़ आ जाएगी और डांट तो पड़ेगी ही। मोनिटर होकर सब बच्चों के सामने डांट खाना ! गिल्ली के लिए तौहीन है। अरे इज्जत है भाई उसकी! अपने रूतबे का पूरा ख्याल है उसे। अपनी सारी जिम्मेदारियों से वाकिफ है वो, आप ना समझाईए उसे। 

दांत दिखाने में भी दांत बचाना। दरअसल इस एक समस्या में उसके लिए आनंद भी छुपा है। दरअसल उसके जबड़े में दो दांत गायब हैं। सो वहां एक फांक है और इस क्लास में घुसने से पहले खाई गई इक्लीयर्स को बाकायदा उपयुक्त फ्रेम में ढ़ाल कर वहां बिठाया गया है ताकि जब तब वहां जीभ फिरा कर टॉफी का अधिकतम आनंद लिया जा सके। 

गिल्ली का वश चले तो वह घुला कर ही पेट में की गई टॉफी को गाय भैसों की तरह फुर्सत से पेट में से वापस ला जुगाली किया करे। माफ कीजिए मैं जानता हूं यह कुछ ज्यादा हो गया लेकिन देर रात अक्सर मुस्कुराते हुए अपने बिस्तर पर गिल्ली ऐसी कल्पनाएं किया करती है।

तो मुंह बना बना कर उपयुक्त से ज्यादा हाव भाव के साथ वह यह राइम्स का अभ्यास कर रही है। अगर वह बड़ी होती तो आप ओवर एक्टिंग कह देते लेकिन उस पर तो मासूमियत का नूर है। देख नहीं रहे हैं कैसे कर्ली हेयर पर वह अपने बालों को उंगली में लपेट कर अपने गालों पर ले आती है। और वेरी फेयर पर अपने आप को पूरे दस में दस मार्क्स वाला परफेक्ट का एक्सप्रेशन देती है। लवली टू पर आते ही वह अपने आप को ही फलाईंग किस देती है। और इन सब के बीच आंखें द्रुत गति से इधर उधर, जाने किधर किधर भागती रहती है। अपने ही जगह पर वह गोल गोल काली, भागती आंखें कितनी जीवंत है! फैलाव से से सिकुड़न तक, अभाव से उदारता तक, गुरूर से मासूमियत तक सब यहीं और इसी में है।

आईए, हम भी दर्शक  दीर्घा में बैठ उसकी इस तरह राइम्स पढ़ने की ट्रीटमेंट पर उम्माह कर फलाईंग किस भेजें। क्योंकि खुदा तो इधरईच है उधर नहीं जहां हम जबरदस्ती खोज रहे हैं।

5 comments:

  1. प्यारी गिल्ली। दुलारी गिल्ली। मोटू गिल्ली। ऐसी गिल्ली, वैसी गिल्ली। जाने, कैसी कैसी गिल्ली।

    फैलाव से से सिकुड़न तक, अभाव से उदारता तक, गुरूर से मासूमियत तक सब यहीं और इसी में है।


    सही कहा सागर खुदा तो इधरईच है उधर नहीं जहां हम जबरदस्ती खोज रहे हैं। हमारी ओर से भी गिल्ली को एक फ़्लाइंग किस... उसकी इस मासूमियत को किसी की नज़र न लगे :)

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  2. हाँ सागर...खुदा इधर ही है.

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  3. खुदा तो इधरईच है उधर नहीं जहां हम जबरदस्ती खोज रहे हैं................hume bhi mila do us khuda se

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  4. ummmmmah :) :) dher sari smileys for gilli

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  5. bookmark me to bhut din se pada tha ap k blog ka address...par time ka kya kre...

    Fb.com/Deepakseth63

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