Tuesday, May 28, 2013

रिजेक्शन by कपिल

ईर ने कहा ब्याह करब
बीर कहिस कि हमहूं ब्याह करब
फत्ते भी बोलिस कि ब्याह करब
तो ऐसेई मज़ाक मज़ाक में हम भी बोल दिए बियाह करेंगे।

तो कपिल ने सागर को केंद्र में रखकर मज़ाक मज़ाक में एक कहानी लिख दी। आप भी नोश फरमाईए। वैसे कपिल मुकरियां भी बहुत अच्छा लिखते हैं और फेसबुक पर उनकी मुकरियां खासी चर्चित हैं। ये मुकरियां किश्तों में उनके ब्लाॅग पर भी मौजूद है।

दफ्तर में हम कपिल के मुंहलगे जूनियर लगते हैं  और घर पर उनके मुंहलगे किराएदार।

दफ्तर के दो लोगों को यानि एक कपिल शर्मा और दूसरे बिश्वजीत बैनजी को ठेल ठाल कर और डांट धोप कर हमने उनका ब्लाॅग बनवाया। कपिल जोकि भाकपा माले के कर्तव्यनिष्ठ कार्यकर्ता हैं, ने हिंदी की राह ली। (कोरबे ना, चोलबे ना) वाले बिस्वजीत बैनर्जी, एक सरकारी मकहमे में उंचे अधिकारी हैं साथ ही अरविंदो काॅलेज में फैकल्टी स्क्रिप्ट राइटिंग टीचर भी, उन्होंने अंग्रेजी की राह ली। हम जो कि विगत 11 साल से इंग्लिश सीख रहे हैं सो बिस्वजीत के ब्लाॅग से दूर दूर ही रहते हैं। हमसे तो अच्छा सिरीदेबी न जी? ऐतना बरिस बादो आके इंगलिश विंगलिश बोल गई! और अवार्ड सवार्ड भी बटोर गई। खैर। जिंदगी है, होता है, चलता है।


http://hamareydaurmaink.blogspot.in/2013/05/blog-post_28.html

4 comments:

  1. जम के बीयर पी के एक गीत याद आता रहा है।

    हम तेरे प्यार में सारा आलम खो बैठे, खो बैठे,
    तुम कहते हो कि ऐसे प्यार को भूल जाओ, भूल जाओ

    दोनों आखों के मोटे मोटे आंसू में सृष्टि बन डोलता है प्रियतम।
    तुम कहते हो कि, लव इज़ सीली थिंग, फोरगेट ईट। फोरगेट ईट।

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  2. एक हिन्दी ब्लॉग बनवाया, बड़ा पुण्य मिलेगा आपको।

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  3. ये कहानी तुम्हे केन्द्र में रखकर नहीं लिखी गई है, खुशफहम हो ये तो मुझे पता था, लेकिन इस दर्ज़ा हो, ये नहीं पता था। मेरी कहानी का पात्र कहीं, कुछ, थोड़ा बहुत तुम्हारे दैनिंदन कार्यव्यापार से थोड़ा बहुत - बहुत थोड़ा सा, मिलता हो सकता है, लेकिन यकीन मानो, मैने बार-बार, सिर्फ इसलिए ही तुम्हे ये कहानी पढ़ने को कहा था। इसके अलावा दिल्ली में आ के बसे बहुत सारे बच्चे इसी तरह की दुविधा से गुजरते हैं, ये भी मान ही लो। अब सबसे आखिर में शिकायत कर रहा हूं, अपनी तारीफ तो बहुत की तुमने, ये नहीं कहा कि कहानी कैसी लगी? तो मेरे भाई कम से कम कोई टिप्पणी आदि।

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    1. भक, बेकार कमेंट है.
      एकबारगी मन में तो आया की स्पैम में डाल दें, लेकिन हम तनी लोकतांत्रिक ढंग से पेस आये.

      असिल में आप मेरे पीने पे धयान नहीं दिए, इसके बाद तो हम चाँद पे नहीं चढ़ते यही क्या कम है ! तारीफ अपने साथ साथ आपकी भी बहुत की है हमने.

      नोट : अपनी प्रतिक्रिया के लिए फुर्सत से आउँगा.

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