Tuesday, June 18, 2013

ट्रेडमिल पर स्लो मोशन में भागती लड़की


तुमसे ही तो कायनात सारी
तुमसे ही तो ऊँचा फलक

आंखे ऐसी कि जुबान बेमतलब 
नमक-तेल और पकाई हुई लाल मिर्च में लिपटी रोटी

गुलाबी होंठ पतले-पतले
जैसे छप्पर से लिपटा लौकी का नन्हा टूसा
किसी बच्ची के नर्म गर्म उंगलियों का स्पर्श

नमी भरे चमकीले बदन पर उभार
जैसे जैसलमेर के रेगिस्तान में तेज़ हवा से रातों रात जमा हुए रेत के धोरे

कमर जैसे बर्थडे पर फुलाया जा रहा आकार लेता गुब्बारा
पहली बारिश के बाद पके अमरूद पर एक कट्टा दांत काटने का निशान

नितंब
उजले बालू में गुना दर गुना पैठ गया और खूब पानी खाया घड़ा

मेरी,
शिकार हो चुकी सिकुड़ती सांसे
लो ब्लड प्रेशर का शिकार मैं
इनसे लग कर सोऊं तो लगे
बुखार में कोई माथे और तलवों पर पट्टियां करता हो कोई।

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