Sunday, June 9, 2013

डंप फुटेज के फ्रीज़ शॉट्स


भाई सा’ब आपने उनकी हंसी सुनी क्या?

जो उनकी जुल्फों में चने को जो बांध कर रखो तो भोर तलक अंकुरित भी हो जाए और काला भी न पड़े।

मैं आदिवासी बन गया हूं। जब दूर तक बारिश के आसार नहीं हैं तो फुहारों सी उनकी हंसी को अपनी हंसुली बनाकर पहन रखा है। उमस का ये मौसम चंदन महका रहा है।

उनकी हंसी विषुवतीय रेखा पर बसर करते लोगों की दूधिया मुस्कान।

समझ नहीं आता उनकी जान ले लूं या अपनी जान दे दूं।

नहीं समझ पाता उन्हें प्यार करना चाहता हूं उनके व्यक्तित्व से प्यार है।

क्या जिंदगी उनके पुष्ट उभारों में छिपा कोई अमरूद का नन्हा सा सौंधा बीज है?






थिरमना कौम बदलना चाहता है।

भाई सा’ब आपने उनकी हंसी सुनी क्या?

1 comment:

  1. बहुत हँस रही हैं वो...जी चाहता है उनके दांत तोड़ दूं

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