Thursday, September 4, 2014

Hold to record. Send to release.

बाहर बारिश है। मैं एक रेस्तरां में अपने बॉस के साथ बैठा हूं। मेरे सामने चार लड़कियां बैठी हैं। एक का मेरी नज़रों से संवाद कायम हो चुका है। बॉस ने यह भांप लिया है। इसलिए मुझे अब चार जोड़ी नज़रों को संभालना है। मैं जुकाम में हॉट कॉर्न एंड सॉर सूप पी रहा हूं। उनसे मिलती नज़र अब परिचित होने को है। वो मेरी ओर देख कर गर्दन घुमाती है और अपनी बाकी तीन सहेलियों में घुलने की कोशिश करती है। कई बार रेस्तरां का आकर्षण चाय की प्याली में आया सुगर का वो टुकड़ा होता है तो चाय में थोड़ा घुल कर भी थोड़ा सा बच जाता है। इसके आगे वो घुलने से इंकार कर देता है।

वो अब अपने कपड़े बार बार ठीक कर रही है। कभी कॉलर को खींचती है कभी शर्ट के नीचे का दोनों प्लेट मिलाकर नीचे खींचती है। इससे उसके दोनों ओर के बटनों के बीच की फांक सिल जाती है। हम हल्के परिचय के बाद भी थोड़े असहज हैं। 

बिल आता है। बॉस पे करते हैं। मैं अपनी मोबाइल समेटता हूं। नज़र एक बोसा। आंखों से बाय कहता हूं लेकिन पलकें इसे संभाल लेती हैं। एक आकर्षण का पटाक्षेप होता है। बाहर बारिश अब भी है लेकिन जाने क्या बरस रहा है....

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