नहीं नहीं, मैं खां साहेब कि बात नहीं कर रहा ... ना ही उस उस दुष्ट बल्लेबाज की जो तुम्हारी आदतन फैंके गए चौथी स्लो डिलीवरी पर रिवर्स खेल गया... और ना ही ओबामा के अचानक इराक दौरे की बात कर रहा हूँ... मैं तो उस दीये की बात करूँगा ना जो शक्तिहीन है, इतना सीधा कि बेमकसद है .. जो छल-प्रपंच नहीं जानता... मकसद ? हाँ मैं सभ्य समाज वाले मकसद की बात नहीं कर रहा ? इसे समझना होगा आपको... दादी मर रही थी तभी आत्मा का ट्रांसफोर्मेशन हो रहा था... वो भौतिकी वाला हीट तो नहीं था ? पता नहीं, पर अगर था तो डायरेकशन तय करनी होगी. एक बात और... यह सच है कि मैं जब भी पतंग उडाता हूँ काले बादल घिर आते हैं... पर इसकी परवाह नहीं मुझे क्या रात में पेड़ तुम्हें चुप्पी साधे खड़े नहीं दिखाई देते हैं ? हाँ. सब आप लोगों जैसे लगते हैं. अँधेरे में सुप्रीम कोर्ट का गुम्बद नज़र आता है ? हाँ, अभी तक तो आ रहा है. गुड ! फिर तुम जिंदा हो अभी. पर क्या यही बड़ी बात है ? नहीं... आवाज़ को सुनना बड़ी बात है, जिस भी शहर में रहे आधी रात को ट्रेन की आवाज़ आती सुनी ? हाँ, पर यह भ...
I do not expect any level of decency from a brat like you..