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ना बात पूरी हुई थी कि रात टूट गयी...


एक सुस्त सा मौसम चल रहा है गदर मचाता हुआ। जैसे सबसे फुर्सत वाले दिनों में ही हम गौर कर पाते हैं हर चीज का घटित होना। ये बात अलग है कि तब उसका एहसास नहीं होता और अत्यंत व्यस्ततम क्षणों में उसके लिए तरसते हैं, उसकी लज्जत महसूस होती है। इन दिनों जो सुन रहा हूं, देख रहा हूं सब ठहरी हुई हैं। 

आसमान में ठहरा सफेद बादल बह रहा है, गमले में उगा पौधा भी बढ़ रहा है। दुनिया नित नई रोज आगे जा रही है (?) सरकार नए कदम उठा रही है। नए पनपते प्यार वादा कर रहे हैं। मिस्र में जनता की आवाज़ सुन ली गई है। बस अंधेरे उजालों में छिपता तुम्हारा हुस्न मुकम्मल नहीं होता। 

एहसास वही हैं पर हर बार उन ख्यालों को नए शब्दों का पैरहन पहना रहा हू। इन ख्यालों के कपड़े उतारने के लिए नए कलफ चढ़ाने होते हैं। यह भी अजब है कि नंगे करने के लिए कपड़े पहनने होते हैं। हमने अपने मनोरंजन के लिए कितना कुछ बना रखा है। तुम्हारी याद के अक्स के इस बुखार का आज सांतवां दिन है। बिस्तर से उठ नहीं पा रहा लेकिन यह क्या है कि मेरे बदन पर पर सकून की गुदगुदी कुछ इस तरह से हो रही है जैसे गर्म पानी की बोतलें घुड़क रही हो। 

मैं तुम्हारा पति नहीं हूं कि तुम्हारे सीने को अपने पीठ पर महसूस करूं अलबत्ता तुम्हारा कंधा थपथपाते वक्त जो समझदारी हमारे आंखों में पैदा हुई उसके बाइस तुम्हारे सीने की बनावट अपने छाती पर महसूस करता हूं। 

सिगरेट और शराब बस सिर्फ इसलिए कि ये आसानी से मयस्सर है। ये अब मज़ा नहीं देते। अब तो अफीम चाहिए जानां। कम से कम हलक से उतरने के बाद अपना असर हुनर तो दिखाएगा तुम्हारी तरह नहीं कि जाओ तो दिल पर कोहसारों की तरह पैठ जाओ और हकीकत में पैरों के निशान तक बुहारती जाओ।

कभी मैंने तुम्हारा तलवा सुलगाया था. तुम मेरा वजूद फूंक दो तो तुम्हारे नक्श में मैं जज्ब हो जाऊं कि मैंने प्यार के नर्म एहसासों को एक अरसे से लिखना छोड़ दिया है। कि यह पढ़कर मुंह का जायका ख़राब हो जाता है, आंत से उठती हुई तड़प जो जीभ की अंतिम छोर पर आ कर रुक जाता है, यह सिलसिला खत्म हो.

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उसने दिल पर चीरा लगाकर उसमें अपने होंठों का प्राणवान चुम्बन के बिरवे रोप दिए।

सौ तड़कती रातें हैं फिर एक मिलन का दिन है। एक हज़ार बद्दुआएं हैं, फिर नेमत की एक घनघोर बारिश है। बारिश कम है जीवन में, प्यास अधिक। इतनी अधिक कि कई बार बारिश के दिन भी प्यास नहीं बुझती। लगातार लगती प्यास हमें मारती है, पत्थर बनाती है। सूखे प्यास का नमी भरा एहसास बारिश वाले दिन ही होता है। दरअसल आज जब मेरी प्यास बुझ रही थी तब मुझे अपने प्यासे होने का सही अर्थ संदर्भ सहित समझ में आया। xxx उसका हाथ अपने हाथ में लिया तो एक ढाढस सा लगा जैसे कोई एक सक्षम व्यक्ति कारगर उपाय बता रहा हो। वो अनपढ़ जाने किस तरह की शिक्षित है कि वह मुझ जैसे अहंकारी में भी कृतज्ञता का भाव पैदा कर देती है। xxx हमने बहुत कोशिश की एक होने की। लेकिन इसी प्रयास में हमारा यह विश्वास पुख्ता हुआ कि हमें एक दूसरे की जरूरत हमेशा रहेगी और हम अधूरे ही रहेंगे। यहां तक कि जिस जिस चुंबन में हमने अपने आप को पूरा समेट कर एक दूसरे में उड़ेल दिया, वहीं वहीं हमें अपने विकलांगता का एहसास हुआ। xxx कोई मां बाहर अपने बच्चे को मार रही है। बच्चा ज़ोर ज़ोर से किकियाए जा रहा है। मां गुस्से में उसे और धुन देती है। बच्चे

समानांतर सिनेमा

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विलंबित ताल

हर ताल विलंबित है। हर कदम लेट है। कदम के रूप में एक पैर उठता है तो दूसरी ज़मीन पर रखने की दर लेट है। पेड़ों के पत्ते एक बार जब झूम कर बांए से दाएं जाते हैं तो उनका फिर से दांए से बांयी ओर जाना लेट है। आदमी घर से निकलने वाला था पर लेट है। स्टेशन से गाड़ी खुलने में लेट है। बहुत मामले रूके पड़े हैं और उनपर कार्यवाई लेट है। दफ्तर में टेबल से फाइलों का सरकना रूका है। चमत्कार होना रूका हुआ है। प्रेम होना तक मुल्तवी है। की जा रही प्रतीक्षा भी होल्ड पर है। बारिश रूकी हुई है। जाम से शहर रूका हुआ है। गाए जाने वाला गीत भी जुबां पर रूका है। किसी से कुछ कहना रूका है। किसी से झगड़ लेने की इच्छा रूकी है। किसी के लिए गाली भी हलक में रूकी हुई है। बाप से बहस करना रूक गया है। मां को घर छोड़कर भाग जाने की धमकी भी पिछले कुछ महीनों से नहीं दी गई है। लिखना रूका है। पढ़ना ठप्प है। जीना रूका पड़ा है। पेड़ों पर के पत्ते रूके हुए हैं। आसमान में चांद रूक गया है। किसी का फोन पर हैलो बोलकर रूकना, रूक गया है। कुछ हो रहा है तो उसका एहसास होना रूक गया है। सिगरेट जल्दी खत्म होना रूक गया है। बारिश अपने ब